"महाकुंभ का संदेश-एक हो पूरा देश" : PM, मुस्लिम देशों के पर्यटक भी बुक करवा रहे हैं होटल
दुनिया के श्रद्धालु डिजिटल महाकुंभ के भी साक्षी बनेंगे : मोदी
- शहर दीवारों व प्रमुख चौराहों को भव्य रूप देने PDA का 60 करोड़ बजट
धर्म नगरी / DNNews ब्यूरो (प्रयागराज)
- शहर दीवारों व प्रमुख चौराहों को भव्य रूप देने PDA का 60 करोड़ बजट
धर्म नगरी / DNNews ब्यूरो (प्रयागराज)
(वा.एप 8109107075 न्यूज़, महाकुंभ-2025 की कवरेज, सदस्यता, कॉपी बटवाने हेतु)
"महाकुंभ का संदेश-एक हो पूरा देश" का नारा देते हुए उन्होंने गंगा के निर्बाध प्रवाह की तरह अविभाजित समाज की आशा व्यक्त करते हुए कहा-
"...अगर कम शब्दों में मुझे कहना है, तो मैं कहूंगा महाकुंभ का संदेश एक हो पूरा देश और अगर दूसरे तरीके से कहना है, तो मैं कहूंगा गंगा की अविरल धारा न बटे समाज हमारा, गंगा की अविरल धारा न बटे समाज हमारा। इस बार प्रयागराज में देश और दुनिया के श्रद्धालु डिजिटल महाकुंभ के भी साक्षी बनेंगे।"
सुनें-
"...इस बार प्रयागराज में देश और विश्वभर के श्रद्धालु डिजिटल महाकुंभ के भी साक्षी बनेंगे। डिजिटल नेविगेशन की मदद से लोग विभिन्न घाटों, मंदिरों और साधुओं के अखाड़ों तक पहुंच पाएंगे। इसी नेविगेशन व्यवस्था से पार्किंग तक पहुंचने में भी मदद मिलेगी। श्री मोदी ने कहा कि पहली बार कुंभ आयोजन में एआई चैट बोर्ड का भी प्रयोग होगा। इसके माध्यम से ग्यारह भारतीय भाषाओं में कुंभ से जुड़ी प्रत्येक जानकारी उपलब्ध हो पाएगी। ...कुंभ मेले का पूरा क्षेत्र एआई संचालित कैमरे से लैस किया जा रहा है। सभी लोग इन सुविधाओं का लाभ उठायें और हैशटैग एकता का महाकुंभ के साथ अपनी सेल्फी अपलोड करें...।" उल्लेखनीय है, विगत 13 दिसंबर को प्रयागराज पहुंचकर संगम में पूजन करने के साथ हेलीकॉप्टर से समूचे कुंभ क्षेत्र को देखा था।
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प्रयागराज महाकुंभ-2025 पर "धर्म नगरी" साधु-संतों, श्रद्धालुओं तीर्थ-यात्रियों, पर्यटकों, संस्थाओं आदि की सुविधा एवं जानकारी प्रदान करने हेतु "महाकुंभ विशेषांकों" प्रकाशित कर रहा है। इसके साथ महाकुंभ मेले हेतु "सूचना केंद्र, हेल्प-लाइन सेवा" शिविर का संचालन, प्रदर्शनी, तीर्थयात्रियों हेतु क्षेत्र में निःशुल्क चाय, दवा वितरण व पैर में थकान/पीड़ा से राहत देने मसाजर मशीन (शिविर में) आदि की सेवा प्रदान किया जाएगा। इन कार्यों में आप भी सहभागी बन सकते हैं। किसी प्रकार से स्वेच्छापूर्वक सहयोग करने हेतु कृपया निःसंकोच संपर्क करें +91-810 910 7075 मोबाइल / वाट्सएप ईमेल- prayagrajkumbh2025@gmail.com
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महाकुंभ मेला-2025 के लिए योगी ने दिए निमंत्रण
नई दिल्ली में अनेक गणमान्य नेताओं से (28 नवंबर) मिलकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महाकुंभ मेला-2025 के लिए निमंत्रण दिया। उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षामंत्री राजनाथ सिंह और मिजोरम के राज्यपाल जनरल वीके सिंह से भेंट किया और महाकुंभ का प्रतीक चिन्ह, कलश, कार्यक्रमों का बुकलेट भी प्रदान की। महाकुंभ मेले का आयोजन को लेकर मुख्यमंत्री ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में चित्र साझा करते हुए बहुमूल्य समय के लिए सभी गणमान्य व्यक्तियों का आभार व्यक्त किया।50 हजार श्रमिक कर रहे परिश्रम महाकुंभ नगरी को बसाने के लिए 50 हजार से अधिक श्रमिक दिन-रात परिश्रम कर रहे हैं। जहाँ जरूरी हुआ, वहाँ पुल बनाए गए। जहाँ पुल बनाना संभव नहीं था, वहाँ स्टील के फोर लेन अस्थायी ब्रिज बनाए गए। रेलवे पुल भी बनाए गए। इतना ही नहीं, प्रयागराज पहुँचने वाली सारी सड़कों का चौड़ीकरण एवं उनका सौंदर्यीकरण किया गया।
#Mahakumbh_2025_ अब तक के सभी कुंभ से भव्य-दिव्य होगा महाकुंभ : योगी
शहर की दिवारों धर्म, अध्यात्म और संस्कृति के विभिन्न प्रतीकों को अंकित किया जाएगा। इन पर इस तरह के चित्र बनाएँगे, जैसे वह उनसे संवाद कर रही हो। इस प्राचीन नगरी के बारे में उन्हें बता रही हो। उनका आधुनिकता के बीच धार्मिकता एवं सांस्कृतिक संगम में स्वागत कर रही हों। इस तरह शहर के लगभग 10 लाख वर्गफीट में इनका चित्रण होगा।
स्थानीय लोगों को रोजगार
एक अनुमान के अनुसार, महाकुंभ-2025 से 45,000 परिवारों को रोजगार मिलेगा। महाकुंभ में 25,000 श्रमिकों को लगाया गया है। महाकुंभ के लिए कौशल विकास के अंतर्गत 45 हजार परिवारों को ट्रेनिंग दी गई। राज्य सरकार ने बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को ठहरने के लिए शहर में 2,000 से अधिक पेइंग गेस्ट फैसिलिटी की सुविधा विकसित की है।
उत्तर प्रदेश सरकार ने साल 2022 में पर्यटन नीति बनाई थी, जिसमें 10 लाख लोगों को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य रखा गया था। ये प्रशिक्षित सेवा प्रदाता इस महाकुंभ में अपनी बड़ी भूमिका निभाएँगे और रोजगार पाएँगे। इनमें पर्यावरण के अनुकूल कुल्हड़, पत्तल-दोने आदि जैसे स्वरोजगार की महती भूमिका सामने आएगी। इससे लघु उद्योगों को बड़े पैमाने पर लाभ होगा।
राज्य का पर्यटन विभाग टूर गाइड, ड्राइवर, नाविक, स्ट्रीट वेंडर सहित कई प्रकार के सेवा प्रदाताओं को हर तरह का प्रशिक्षण उपलब्ध करा रहा है। यूपी पर्यटन विभाग ने पर्यटकों को लुभाने एवं नाविकों को आय बढ़ाने के लिए 2,000 से अधिक नावकों को प्रशिक्षित किया है। इसमें श्रद्धालुओं के साथ व्यवहार-कुशलता से लेकर उनकी सुरक्षा का ध्यान रखने तक की पक्ष भी है। कुंभ के समय भोजन की पवित्रता को बनाए रखने स्थानीय महिलाएँ मिट्टी के चूल्हे भी बेच रही हैं। इस तरह महाकुंभ में आने वाले श्रद्धालुओं के प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से जुड़े हर सेवा प्रदाता एवं लघु उद्योगों से जुड़े लोगों को ट्रेनिंग दी गई है, ताकि इस महाकुंभ में आने वाले लोगों को धार्मिक एवं सांस्कृतिक अनुभव के साथ-साथ मेहमान नवाजी का अपूर्व आनंद प्राप्त हो।
महाकुंभ के ‘टेंट सिटी’ में राजसी ठाट-बाट
महाकुंभ में 2,000 से अधिक पेइंग गेस्ट के अलावा, राज्य सरकार ने कुंभ क्षेत्र में श्रद्धालुओं के लिए 2,000 से अधिक स्वीस कॉटेज शैली में टेंट स्थापित किया है। इसके लिए लग्जरी टेंट सिटी स्थापित की जा रही है, जिसे उत्तर प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम लिमिटेड (UPSTDC) 6 साझेदारों के साथ मिलकर कर रहा है।
टेंट सिटी में कई तरह के ब्लॉक स्थापित किए जा रहे हैं। इन ब्लॉक्स में आगमन, कुंभ कैंप इंडिया, ऋषिकुल कुंभ कॉटेज, कुंभ विलेज, कुंभ कैनवास, कुंभ एरा आदि प्रमुख हैं। इन टेंट्स में अंतर्राष्ट्रीय मानकों के तहत फाइव स्टार होटल वाली सुविधाएँ मिलेंगी। यह सुपर डिलक्स, टेंट विला, महाराजा, स्वीस कॉटेज और डॉर्मेटरी फॉर्मेट में उपलब्ध होगा।
वोकल फॉर लोकल
प्रयागराज महाकुंभ-2025 के माध्यम से उप्र के स्थानीय उत्पादों को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रमोट करने की रूप-रेखा बनाई है। सरकार ने इसके लिए पीएम मोदी की ‘वोकल फॉर लोकल’ को अपना मूल मंत्र बनाया है। इस दौरान ‘वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रोडक्ट’ यानी हर जिले के एक बड़े उत्पाद को बढ़ावा दिया जाएगा। बनारस की साड़ी, मुरादाबाद के पीतल का सामान, गोरखपुर का टेराकोटा, बाँदा के शजर पत्थर से बने उत्पाद को अंतर्राष्ट्रीय मंच पर प्रसिद्धि एवं बढ़ावा मिलने का अनुमान है। इसके कारण इन जिलों के संबंधित उत्पादों के बढ़ने की आशा भी है।
75 देशों से आएँगे पर्यटक
प्रयागराज महाकुंभ में दुनिया भर के 75 से अधिक देशों से 45 करोड़ लोगों के आने की आशा है। इनमें श्रद्धालु से लेकर पत्रकार एवं शोधार्थी तक शामिल हैं। यूरोप से ही लगभग 4 लाख पर्यटक केवल महाकुंभ को देखने के लिए आ सकते हैं। यूरोप के कई देशों के टूर ऑपरेटरों ने यूपी पर्यटन विभाग से संपर्क किया है। संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन, कुवैत आदि जैसे मुस्लिम देशों के पर्यटक भी महाकुंभ देखने के लिए प्रयागराज में होटल बुक करवा रहे हैं। इस तरह विदेशी पर्यटकों के आने से भारत को विदेशी मुद्रा भी प्राप्त होगी। इससे उत्तर प्रदेश के साथ-साथ भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। इसके साथ ही ब्रांड यूपी की दुनिया भर में पहचान भी मिलेगी।
भारतीय व्यंजन रेसिपी
उल्लेखनीय है, अर्द्धकुंभ-2019 में तलभग 24 करोड़ श्रद्धालुओं ने आए थे, जिसमे 25 लाख विदेशी पर्यटक थे। इस बार यह संख्या बहुत तेजी से बढ़ती दिखाई दे रही है। यह देश ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था में हुए अभूतपूर्व सुधार के स्वागत एवं विश्वास के रूप में भी देखा जा रहा है। वहीं, कुल पर्यटकों की संख्या देखें, तो पिछले साल यानी 2023 में कुल 48 करोड़ पर्यटक उत्तर प्रदेश आए। इनमें घरेलू और विदेशी, दोनों तरह के पर्यटक रहे। यह आँकड़ा साल 2022 की अपेक्षा 50% अधिक था। आशा हैं, साल 2028 में यह आँकड़ा 85 करोड़ पहुँच जाएगी। इस लिहाज से अगले साल के महाकुंभ की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है।
अन्य धार्मिक स्थलों तक चलेंगी विशेष ट्रेनें
महाकुंभ में आने वाले श्रद्धालु विंध्याचल, अयोध्या, वाराणसी, वृंदावन, मथुरा जैसे प्रसिद्ध तीर्थस्थल भी जा सकते हैं। महाकुंभ यात्रा के दौरान ही तीर्थयात्री इन तीर्थों की भी यात्रा कर सकें, इसके लिए राज्य सरकार ने धार्मिक कॉरीडोर बनाया है। इनमें वाराणसी का जलमार्ग से लेकर विशेष ट्रेनें चलाने तक की विशेष व्यवस्था की गई है।
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महाकुंभ में लगभग 40 करोड़ लोगों के पहुँचने की आशा है, जिससे स्थानीय रोजगार, व्यापार, क्षेत्रीय हस्तशिल्प एवं कला के साथ-साथ पर्यटन एवं समग्र विकास को भी बढ़ावा मिलेगा। कुंभ के कारण सरकार क्षेत्र के बुनियादी ढाँचे को हर तरह से विकसित करती है, जिसका लाभ नागरिकों को मिलता है। महाकुंभ के लिए योगी आदित्यनाथ की सरकार ने 500 से अधिक परियोजनाओं को पूरा करने का लक्ष्य रखा है। इन परियोजनाओं की कुल लागत लगभग 6,382 करोड़ रुपए है। इनमें सड़कों का चौड़ीकरण, पेयजल की पाइपलाइन बिछाना, नई बसें चलाना आदि के साथ-साथ अन्य तरह की बुनियादी ढाँचे का विकास शामिल है।
प्रयागराज में आने वाले श्रद्धालुओं को आकर्षित करने शहर को विशेष रूप देने का प्रयास किया गया है। प्रयागराज विकास प्राधिकरण ने शहर दीवारों और प्रमुख चौराहों को भव्य रूप देने के लिए अलग से 60 करोड़ रुपए का बजट रखा है। इसमें शहर के प्रमुख दीवारों पर स्ट्रीट आर्ट, चौराहों पर म्यूरल्स (भित्ति चित्र), विभिन्न शैली की मूर्तियाँ (स्कल्पचर), लैंड स्केपिंग, ट्रैफिक साइन, ग्रीन बेल्ट और हॉर्टिकल्चर आदि का काम शामिल हैं।
प्रयागराज में आने वाले श्रद्धालुओं को आकर्षित करने शहर को विशेष रूप देने का प्रयास किया गया है। प्रयागराज विकास प्राधिकरण ने शहर दीवारों और प्रमुख चौराहों को भव्य रूप देने के लिए अलग से 60 करोड़ रुपए का बजट रखा है। इसमें शहर के प्रमुख दीवारों पर स्ट्रीट आर्ट, चौराहों पर म्यूरल्स (भित्ति चित्र), विभिन्न शैली की मूर्तियाँ (स्कल्पचर), लैंड स्केपिंग, ट्रैफिक साइन, ग्रीन बेल्ट और हॉर्टिकल्चर आदि का काम शामिल हैं।
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स्थानीय लोगों को रोजगार
एक अनुमान के अनुसार, महाकुंभ-2025 से 45,000 परिवारों को रोजगार मिलेगा। महाकुंभ में 25,000 श्रमिकों को लगाया गया है। महाकुंभ के लिए कौशल विकास के अंतर्गत 45 हजार परिवारों को ट्रेनिंग दी गई। राज्य सरकार ने बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को ठहरने के लिए शहर में 2,000 से अधिक पेइंग गेस्ट फैसिलिटी की सुविधा विकसित की है।
उत्तर प्रदेश सरकार ने साल 2022 में पर्यटन नीति बनाई थी, जिसमें 10 लाख लोगों को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य रखा गया था। ये प्रशिक्षित सेवा प्रदाता इस महाकुंभ में अपनी बड़ी भूमिका निभाएँगे और रोजगार पाएँगे। इनमें पर्यावरण के अनुकूल कुल्हड़, पत्तल-दोने आदि जैसे स्वरोजगार की महती भूमिका सामने आएगी। इससे लघु उद्योगों को बड़े पैमाने पर लाभ होगा।
राज्य का पर्यटन विभाग टूर गाइड, ड्राइवर, नाविक, स्ट्रीट वेंडर सहित कई प्रकार के सेवा प्रदाताओं को हर तरह का प्रशिक्षण उपलब्ध करा रहा है। यूपी पर्यटन विभाग ने पर्यटकों को लुभाने एवं नाविकों को आय बढ़ाने के लिए 2,000 से अधिक नावकों को प्रशिक्षित किया है। इसमें श्रद्धालुओं के साथ व्यवहार-कुशलता से लेकर उनकी सुरक्षा का ध्यान रखने तक की पक्ष भी है। कुंभ के समय भोजन की पवित्रता को बनाए रखने स्थानीय महिलाएँ मिट्टी के चूल्हे भी बेच रही हैं। इस तरह महाकुंभ में आने वाले श्रद्धालुओं के प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से जुड़े हर सेवा प्रदाता एवं लघु उद्योगों से जुड़े लोगों को ट्रेनिंग दी गई है, ताकि इस महाकुंभ में आने वाले लोगों को धार्मिक एवं सांस्कृतिक अनुभव के साथ-साथ मेहमान नवाजी का अपूर्व आनंद प्राप्त हो।
महाकुंभ के ‘टेंट सिटी’ में राजसी ठाट-बाट
महाकुंभ में 2,000 से अधिक पेइंग गेस्ट के अलावा, राज्य सरकार ने कुंभ क्षेत्र में श्रद्धालुओं के लिए 2,000 से अधिक स्वीस कॉटेज शैली में टेंट स्थापित किया है। इसके लिए लग्जरी टेंट सिटी स्थापित की जा रही है, जिसे उत्तर प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम लिमिटेड (UPSTDC) 6 साझेदारों के साथ मिलकर कर रहा है।
टेंट सिटी में कई तरह के ब्लॉक स्थापित किए जा रहे हैं। इन ब्लॉक्स में आगमन, कुंभ कैंप इंडिया, ऋषिकुल कुंभ कॉटेज, कुंभ विलेज, कुंभ कैनवास, कुंभ एरा आदि प्रमुख हैं। इन टेंट्स में अंतर्राष्ट्रीय मानकों के तहत फाइव स्टार होटल वाली सुविधाएँ मिलेंगी। यह सुपर डिलक्स, टेंट विला, महाराजा, स्वीस कॉटेज और डॉर्मेटरी फॉर्मेट में उपलब्ध होगा।
वोकल फॉर लोकल
प्रयागराज महाकुंभ-2025 के माध्यम से उप्र के स्थानीय उत्पादों को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रमोट करने की रूप-रेखा बनाई है। सरकार ने इसके लिए पीएम मोदी की ‘वोकल फॉर लोकल’ को अपना मूल मंत्र बनाया है। इस दौरान ‘वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रोडक्ट’ यानी हर जिले के एक बड़े उत्पाद को बढ़ावा दिया जाएगा। बनारस की साड़ी, मुरादाबाद के पीतल का सामान, गोरखपुर का टेराकोटा, बाँदा के शजर पत्थर से बने उत्पाद को अंतर्राष्ट्रीय मंच पर प्रसिद्धि एवं बढ़ावा मिलने का अनुमान है। इसके कारण इन जिलों के संबंधित उत्पादों के बढ़ने की आशा भी है।
75 देशों से आएँगे पर्यटक
प्रयागराज महाकुंभ में दुनिया भर के 75 से अधिक देशों से 45 करोड़ लोगों के आने की आशा है। इनमें श्रद्धालु से लेकर पत्रकार एवं शोधार्थी तक शामिल हैं। यूरोप से ही लगभग 4 लाख पर्यटक केवल महाकुंभ को देखने के लिए आ सकते हैं। यूरोप के कई देशों के टूर ऑपरेटरों ने यूपी पर्यटन विभाग से संपर्क किया है। संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन, कुवैत आदि जैसे मुस्लिम देशों के पर्यटक भी महाकुंभ देखने के लिए प्रयागराज में होटल बुक करवा रहे हैं। इस तरह विदेशी पर्यटकों के आने से भारत को विदेशी मुद्रा भी प्राप्त होगी। इससे उत्तर प्रदेश के साथ-साथ भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। इसके साथ ही ब्रांड यूपी की दुनिया भर में पहचान भी मिलेगी।
भारतीय व्यंजन रेसिपी
उल्लेखनीय है, अर्द्धकुंभ-2019 में तलभग 24 करोड़ श्रद्धालुओं ने आए थे, जिसमे 25 लाख विदेशी पर्यटक थे। इस बार यह संख्या बहुत तेजी से बढ़ती दिखाई दे रही है। यह देश ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था में हुए अभूतपूर्व सुधार के स्वागत एवं विश्वास के रूप में भी देखा जा रहा है। वहीं, कुल पर्यटकों की संख्या देखें, तो पिछले साल यानी 2023 में कुल 48 करोड़ पर्यटक उत्तर प्रदेश आए। इनमें घरेलू और विदेशी, दोनों तरह के पर्यटक रहे। यह आँकड़ा साल 2022 की अपेक्षा 50% अधिक था। आशा हैं, साल 2028 में यह आँकड़ा 85 करोड़ पहुँच जाएगी। इस लिहाज से अगले साल के महाकुंभ की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है।
अन्य धार्मिक स्थलों तक चलेंगी विशेष ट्रेनें
महाकुंभ में आने वाले श्रद्धालु विंध्याचल, अयोध्या, वाराणसी, वृंदावन, मथुरा जैसे प्रसिद्ध तीर्थस्थल भी जा सकते हैं। महाकुंभ यात्रा के दौरान ही तीर्थयात्री इन तीर्थों की भी यात्रा कर सकें, इसके लिए राज्य सरकार ने धार्मिक कॉरीडोर बनाया है। इनमें वाराणसी का जलमार्ग से लेकर विशेष ट्रेनें चलाने तक की विशेष व्यवस्था की गई है।
प्रयागराज महाकुंभ को वाराणसी से सीधे जोड़ने के लिए रेलवे ने वाराणसी कैंट से प्रयागराज के बीच 34 ट्रेनें चलाने का निर्णय लिया है। ऐसी ही विशेष ट्रेन प्रयागराज से अयोध्या, प्रयागराज से विंध्याचल और प्रयागराज से मथुरा-वृंदावन के बीच चलाने का निर्णय लिया गया है।
इन शहरों के लिए ‘फास्ट रिंग मेमू’ सेवा शुरू की गई है। यह फास्ट रिंग मेमू सेवा प्रयागराज से अयोध्या, वाराणसी और प्रयागराज आएगी। इसी तरह से दूसरी ट्रेन प्रयागराज से वाराणसी, फिर अयोध्या और फिर प्रयागराज आएगी। मुख्य स्नान पर्वों को छोड़कर यह सेवा सभी दिन शुरू रहेगी।
इन शहरों के लिए ‘फास्ट रिंग मेमू’ सेवा शुरू की गई है। यह फास्ट रिंग मेमू सेवा प्रयागराज से अयोध्या, वाराणसी और प्रयागराज आएगी। इसी तरह से दूसरी ट्रेन प्रयागराज से वाराणसी, फिर अयोध्या और फिर प्रयागराज आएगी। मुख्य स्नान पर्वों को छोड़कर यह सेवा सभी दिन शुरू रहेगी।
महाकुंभ की कैसे निर्धारित होती है तिथियाँ
महाकुंभ मेले का सनातन हिंदू धर्म में अत्यधिक महत्व है। इस बार इसका आयोजन 13 जनवरी से प्रयागराज में हो रहा है। यह मेला दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक मेलों में से एक है, जो 12 वर्षों में एक बार आयोजित किया जाता है तो चलिए इससे जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण बातें जानते हैं।
शास्त्रों में प्रयागराज को तीर्थ राज या 'तीर्थ स्थलों का राजा' भी कहा जाता है। मान्यतानुसार, पहला यज्ञ ब्रह्माजी द्वारा यहीं किया गया था। महाभारत समेत विभिन्न पुराणों में इसे धार्मिक प्रथाओं के लिए जाना जाने वाला एक पवित्र स्थल माना गया है। जब देवताओं और असुरों के बीच अमृत पाने को लेकर लगभग 12 दिनों तक लड़ाई चली थी। देवताओं के बारह दिन मनुष्य के बारह सालों के समान होते हैं। यही कारण है, कि12 साल बाद महाकुंभ लगता है।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब बृहस्पति ग्रह, वृषभ राशि में हों और इस अवधि / दौरान सूर्य देव मकर राशि में आते हैं, तो कुंभ मेले का आयोजन प्रयागराज में होता है। इसी प्रकार, जब गुरु बृहस्पति, कुंभ राशि में हों और उस दौरान सूर्य देव मेष राशि में गोचर करते हैं, तब कुंभ हरिद्वार में आयोजित किया जाता है।
वहीं, जब सूर्य और बृहस्पति सिंह राशि में विराजमान हो, तो महाकुंभ नासिक में आयोजित होता है। जबकि बृहस्पति सिंह राशि में हों और सूर्य मेष राशि में हों, तो कुंभ का मेला उज्जैन में लगता है।
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